लाला गेंदामल ने खोला बीड़ी का कारखाना,
बीड़ी के प्रचार को एक माडल था ढूंढ़वाना.
उनके एक साथी ने दारासिंह को किया रेफर,
दारा का फोटू खिंचवा छपवाए बीड़ी के बैनर.
अगले दिन बीड़ी के बण्डल बाज़ार गए बिकने,
बीड़ी तो कोई न ख़रीदे पर सब लगे हंसने.
तभी दारा लाला के पास पहुंचा गुस्से से लाल,
पकड़ लाला का गट्टा बोला — तेरी ये मजाल.
लाला रह गया भौंचक्का उसे माजरा समझ न आया,
तब दारासिंह ने उसे बीड़ी का रैपर दिखलाया.
ऐसी प्रिंटिंग मिस्टेक थी कि लाला ने पकड़े कान,
“पहलवान छाप बीड़ी” कि जगह था “बीड़ी छाप पहलवान”.