बाप

थके हुए बाप, हारे हुए बाप,

वक़्त की चाबुक के मारे हुए बाप.

दे सकते पैसा, न देते अपना वक़्त,

बच्चा फिर बनेगा बबूल का दरख़्त,

पैसे वाले बाप ये कैसे वाले बाप.

दी गाडी की चाबी, ये कैसी बेताबी,

न आये driving तो क्या है खराबी,

 कार वाले बाप हैं बेकार वाले बाप.

अकेला पूरा कमरा और उसमे इन्टरनेट,

गुमनाम नीली दुनिया में बच्चा हुआ सेट,

कोठी वाले बाप जैसे कोठे वाले बाप.

इतने हुए बच्चे की कम पड़े कच्छे,

बच्चे तो बिना बनियान के ही अच्छे,

गरीब वाले बाप बे-तरतीब वाले बाप.

न सगों से संपर्क, न गैरों को अपनाया,

बढ़ता गया मर्ज ज्यों ज्यों इलाज़ करवाया,

N R I वाले बाप हैं M R I वाले बाप.

अमरीका को गरियाएं, वहीं बच्चों को भिजवायें,

बे-इमानी को कोसे, खुद करते न शरमाएँ,

भारत वाले बाप बड़ी गारत वाले बाप.

Published in: on जनवरी 12, 2010 at 12:16 अपराह्न  टिप्पणी करे  

Nurse-ry Poem: मच्छर

अरे भाई मच्छर करते हैं परेशान

न जागते में चैन न सोते में आराम.

अरे भाई …

कल रात मजे में सो रहा था,

सुनहरे सपनो में खो रहा था,

तभी सुनी एक मीठी तान,

खड़े हो गए मेरे कान,

सुर कोई सुन्दर गुनगुना रहा था,

जागा तो देखा – मच्छर भुन भुना रहा था.

हुआ एक मधुर स्वप्न नाकाम.

अरे भाई …

कल दिन में आँगन में बैठा था,

हाथ में बर्फी और पैठा था,

बड़े मजे में खा रहा था,

नगमा कोई गुन गुना रहा था,

लगा जोर से पडा एक चांटा,

गाल पर मच्छर ने काटा.

खुजाते खुजाते हो गई शाम.

अरे भाई …

एक दिन ख्यालो में खोया हुआ था,

न जागा न सोया हुआ था,

कर रहा था कुछ चिंतन,

बूझ रहा था रहस्य चिरंतन,

तभी शूल चुभा और हुआ हंगामा,

यूँ उछला फट गया पायजामा.

लगा मेरी कल्पना में फच्चर,

क्या बताऊँ कहाँ काट गया मच्छर.

औंधा लेट कर लगाईं बाम.

अरे भाई मच्छर करते हैं परेशान.

Published in: on जनवरी 10, 2010 at 11:10 पूर्वाह्न  Comments (4)  

आलू रे आलू

 आलू रे आलू,

कैसे तुझे खा लूं,

मेरा तो गणित सीधा,

सोना बेच तुझे ख़रीदा,

तेरे चाहने वाले बड़े,

दर्शन को बाहर खड़े,

कैसे उन्हें टालूँ,

आलू रे आलू …

तू ही है चाहत मेरी,

सोने सी रंगत तेरी,

एक आस थी मेरे मन में,

अपने इस जीवन में,

इक बार तुझे पा लूं,

आलू रे आलू …

तुझ को मैं लोक्कर में रखूं,

रोज निहारू, कभी न चक्खूं,

बिन तेरे खाना रद्दी,

मिले गर ओबामा की गद्दी

तेरे बदले, न लूं,

आलू रे आलू,

कैसे तुझे खा लूं.

Published in: on जनवरी 4, 2010 at 4:59 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे