Incredible India (in Grocery prices)

 Incredible India , Incredible India !

महंगे हुए कद्दू, गायब हुई भिन्डियाँ.

Incredible India , Incredible India !

प्याज के चक्कर में पड़े इनकम टैक्स के छापे,

खरीद लाई थी एक किलो, वसुंधरा राजे सिंधिया.

Incredible India , Incredible India !

कल मिली तनखा तो लाया सौ ग्राम आलू,

गायब हुआ चैन उड़ गई आँखों से निंदिया.

Incredible India , Incredible India !

तिजोरी में राखी थी एक अदरक की गाँठ,

खबर लगी तो पीछे पड़ गयी मीडिया.

Incredible India , Incredible India !

musium में रखा देखा, पन्ने से महंगा परमल,

सपने में परमल से, मन खेले डांडिया.

Incredible India , Incredible India !

ओलम्पिक में अब मिलते, सोने से महंगे नीबू,

अमरीका चीन लायें भर भर के अपनी हंडिया.

Incredible India , Incredible India !

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Published in: on दिसम्बर 30, 2009 at 4:11 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  

सर्दी आयी

सर्दी आयी सर्दी आयी

नहाने की हुई छुट्टी भाई, सर्दी आयी …

पड़ोस में जो रहते हैं,

वो मास्टर जी कहते हैं,

पानी बहुत कीमती है,

मैंने बूँद बूँद बचाई, सर्दी आयी …

किसी को भी नहीं इल्म है,

नहाना कितना बड़ा जुल्म है,

इस से कितनी हानि होती,

जिसकी नहीं कोई भरपाई, सर्दी आयी …

मैं तो पहले से  ही पतला,

नहा  के हो गया और भी दुबला,

  धुल जाती खाल पे मैंने

मेल की जो परत चढ़ाई, सर्दी आयी …

काश अगर कुछ ऐसा होता,

जग में ये पानी न होता,

न हर महीने दोस्त ये कहते,

अब तो नहा ले भाई, सर्दी आयी …

Published in: on दिसम्बर 26, 2009 at 12:17 अपराह्न  टिप्पणी करे  
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World’s smallest Hindi poem

कौन?

मौन !!!

Published in: on दिसम्बर 26, 2009 at 11:38 पूर्वाह्न  Comments (4)  

तेल देखो तेल की धार देखो

 

तेल देखो तेल की धार देखो,

अमरीका और यूरोप का उधार देखो,

अमरीका को मंदी की छींक आई तो,

दुनिया को चढ़ा बुखार देखो.

आँखों में खून, दिल में जनून

दरिन्दगी  का व्यापार देखो.

मूर्खता सजाई drawing रूम में,

अकल का डाला अचार देखो.

जागती आँखों से सपना देखो,

सपनों में सुनहरा संसार देखो.

खोखली है रिश्तों की नींव 

मिथ्या है जीवन का सार देखो.

खोल NGO  सारी ग्रांट पीओ,

और धक्के खाते ईमानदार देखो.

हाकिम मरे कुत्ते की मौत, 

बे-आवाज़ लाठी की मार देखो.

महफूज़ था जो आस्तीन में,

वो खंजर सीने के पार देखो.

चंदे के धंधे में गंदे हाथ,

खरीदी पर lexus कार देखो.

भारत की बेबसी बिकाऊ है,  

स्लम  डॉग में  बार बार देखो.

नंगे से पंगे पे दंगे हुए,

प्रजातंत्र का चमत्कार देखो.

ख़ुशी का सब भ्रम टूट जाएगा,

बस आज का अखबार देखो.

नेता जिसपे मूत रहे,

देश है वो दीवार देखो.

मेरे जैसे भी लिखने लगे, 

कविता का हुआ  बंटाधार देखो.

Published in: on दिसम्बर 25, 2009 at 5:28 अपराह्न  टिप्पणी करे  

कौन किसी से लेगा पंगा

कौन किसी से लेगा पंगा,

इस हमाम में हर कोई नंगा,

मन चंगा तो कठोती में गंगा,

मन मैला तो हो जाए दंगा.

Published in: on दिसम्बर 25, 2009 at 4:38 अपराह्न  Comments (1)  

हास परिहास जरूरी

गर जीना है मजबूरी,
तो हास परिहास जरूरी.
भवसागर की चक्की
 में पिस के मौत है पक्की,
तो कमर अपनी कस ले,
खुल के ज़रा हंस ले.
 
Published in: on दिसम्बर 25, 2009 at 4:20 अपराह्न  Comments (1)